बंद कमरा, मैं और वो


Antarvasna, kamukta: हमारा पूरा परिवार अभी संयुक्त परिवार में रह रहा है घर में छोटी मोटी अनबन तो होती ही रहती हैं लेकिन फिर भी मेरी मां ने आज तक घर की बागडोर संभाल कर रखी हुई है और वह परिवार को एकजुट करने में हमेशा ही लगी रहती हैं। पिताजी के देहांत के बाद हम चारों भाइयों ने हीं घर की जिम्मेदारी को अपने कंधों पर संभाल लिया घर में मैं ही सबसे बड़ा था इसलिए मेरे ऊपर ही सब की जिम्मेदारी है। मेरी पत्नी मीना ने भी मेरा बहुत साथ दिया और हम लोग अभी भी सब साथ में रहते हैं हम चारों भाइयों ने मिलकर अपना कारोबार शुरू किया और अभी तक हम उस कारोबार को करते आ रहे है हमारा काम बहुत ही अच्छे से चल रहा है। मेरी पत्नी कई बार मुझे कहती है कि तुमने अपने परिवार के लिए इतना कुछ किया है लेकिन तुम्हारे भाई तुम्हें बिल्कुल भी नहीं मानते हैं। मैंने अपनी पत्नी को कई बार समझाया कि तुम ऐसी बातें मेरे सामने मत किया करो क्योंकि मुझे नहीं लगता कि तुम कुछ सही कहती हो।

मेरी पत्नी एक बड़े घराने की है और वह चाहती थी कि हम लोग अलग हो जाएं लेकिन मैं कभी भी अपने भाइयों से अलग नहीं होना चाहता था और ना ही वह मुझसे अलग होना चाहते थे। हमारे पत्नियों के बीच में हमेशा ही झगड़े होते रहते थे लेकिन उसके बावजूद भी मेरी मां ने अपने घर को एकजुटता में बांधा हुआ था। अब हम लोग अपने कारोबार को और बढ़ाना चाहते थे और उसके लिए हम लोगों ने दिल्ली तक काम करने के बारे में सोच लिया था क्योंकि दिल्ली में हम लोगों के कारोबार की खबर बहुत ज्यादा होने वाली थी इसलिए हम लोग अब दिल्ली में अपना काम शुरू करना चाहते थे। लखनऊ से हम लोगों ने दिल्ली में अपना काम शुरू करने के बारे में सोचा तो मैंने कुछ दिन दिल्ली में रहने के बारे में अपने मन में ख्याल बना लिया। मैं कुछ दिनों तक दिल्ली में ही था मैं अपने मसाले के बिजनेस के लिए ढूंढ रहा था ताकि मुझे कोई डिस्ट्रीब्यूटर मिल सके और हमारे सामान को बाजार तक पहुंचा पाए।

मेरी एक दो डिस्ट्रीब्यूटर से बात तो हुई थी लेकिन उनके साथ कुछ बात नहीं जमी इसलिए मैंने फिलहाल तो दिल्ली में अपना काम शुरू करने के बारे में अपने दिमाग से ख्याल निकाल दिया था लेकिन कुछ ही समय बाद जब मुझे एक डिस्ट्रीब्यूटर का फोन आया और वह कहने लगे कि मुझे आपका नंबर रतन ने दिया है। मैंने उन्हें कहा हां भाई साहब कहिये तो वह मुझे कहने लगे कि मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि आप दिल्ली में कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो मैं उसमे आपकी मदद कर सकता हूं। मैंने उन्हें कहा यदि आप मेरी मदद कर दे तो मुझे बहुत खुशी होगी और आपको भी उसमें मुनाफा हो जाएगा वह मुझे कहने लगे कि क्या आप मुझसे मिलने आ सकते हैं। मैंने उन्हें कहा हां क्यों नहीं मैं आपसे मिलने के लिए आ जाता हूं। मेरा छोटा भाई रतन जो कि काम को लेकर बहुत ही ज्यादा ईमानदार और वफादार है रतन ने हीं मेरा नंबर अभिषेक को दिया था। अभिषेक से मिलने के लिए मैं जब दिल्ली गया तो मेरी और अभिषेक की बात हुई अभिषेक ने मुझे कहा कि भाई साहब आप बिल्कुल भी फिक्र ना करें मैं आपके कारोबार को यहां दिल्ली में पूरी तरीके से सेट कर दूंगा। मैंने अभिषेक से कहा चलो यदि ऐसा हो जाता है तो आपको भी हम लोग उसमें अच्छा खासा मुनाफा दे देंगे। वह मुझे कहने लगे कि देखिए अजय भाई साहब मुझे काम शुरू करने में कोई भी परेशानी नहीं है लेकिन यदि आप मुझे बता देते कि आप मुझे सामान किस दाम में देने वाले हैं तो आगे चलकर भी हम लोगों का व्यापार अच्छा रहेगा। मैंने अभिषेक को सब कुछ बता दिया तो अभिषेक भी मान गए अब अभिषेक ने दिल्ली में काम करना शुरू कर दिया था दिल्ली में हमारे मसाले का कारोबार चलने लगा था और धीरे-धीरे वह और भी आगे बढ़ने लगा। हमारे पास अब दिल्ली से काफ़ी ऑर्डर आने लगा था यह सब अभिषेक की वजह से ही हो पाया था इसलिए अभिषेक को हम लोगों ने दिल्ली में डिस्ट्रीब्यूटर बना दिया था और वही अपने माध्यम से बाजार में सामान बेचा करते थे। मुझे भी काफी मुनाफा हो रहा था इसलिए मैंने दिल्ली में ही अब एक छोटी सी फैक्ट्री डालने के बारे में सोच लिया था जिससे कि थोड़ा बहुत पैसा बच सके। दिल्ली में मैंने अब एक फैक्ट्री शुरू कर दी थी और हम लोगों का मसाला काफी बिकने लगा था इसलिए मुझे अब दिल्ली में ही काम संभालना पड़ा।

मेरे तीनो भाई लखनऊ में ही काम संभाल रहे थे क्योंकि लखनऊ में बहुत ज्यादा काम था इसलिए वहां पर वह तीनों मिलकर काम कर रहे थे। दिल्ली में भी अब काम बहुत अच्छा चलने लगा था अभिषेक से मेरी मुलाकात हर रोज हो जाया करती थी मुझे दिल्ली में और भी लोगों के फोन आ रहे थे लेकिन मैंने सब को मना कर दिया था क्योंकि अभिषेक के साथ मेरा व्यवहार बहुत ही अच्छा था और वह मुझे अच्छा काम भी कर के दे रहे थे मुझे और किसी की जरूरत ही नहीं थी। अब धीरे-धीरे दिल्ली के आसपास के जितने भी छोटे-मोटे इलाके थे वहां तक भी हमारा सामान पहुंचने लगा था अभिषेक के साथ मेरी अच्छी बोल चाल हो गई थी तो मैं उनसे मिलने के लिए उनके घर पर चला जाया करता था। अभिषेक के परिवार में भी अब सब लोग मुझे पहचानने लगे थे और अभिषेक मुझे कहने लगे कि अजय भाई साहब आप की बदौलत ही आज मैंने यह घर खरीदा है। अभिषेक ने कुछ दिनों पहले ही नया घर खरीदा था और वह सब अच्छा कारोबार चलने की वजह से ही हो पाया था। मैंने अभिषेक से कहा कि यदि ऐसा ही काम चलता रहा तो तुम जल्दी और तरक्की कर लोगे अभिषेक कहने लगा हां जी भाई साहब आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं यदि ऐसा ही काम चलता रहा तो जल्द ही और भी तरक्की हो जाएगी।

अभिषेक न एक दिन अपने घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी हुई थी और उस दिन का अभिषेक ने मुझे घर पर डिनर के लिए भी इनवाइट किया था। मैं अभिषेक के घर पर चला गया और जब मैं उस दिन अभिषेक के घर गया तो अभिषेक के पड़ोस में रहने वाली एक महिला भी आई हुई थी मुझे वह बहुत अच्छी लगी अभिषेक ने मुझे बताएं कि उनके पति नहीं है और उनके पति का देहांत कुछ वर्षों पहले हो गया था। मुझे भी तो कोई ऐसा चाहिए था जिससे कि मैं दिल्ली में रह कर बात कर सकूं मैंने उनसे बात करनी शुरू कर दी उनका नाम बबीता है और बबीता से बात करना मुझे अच्छा लगता। हम लोग आपस में बात करते तो मैं उनसे कई बार सेक्स की डिमांड कर दिया करता था लेकिन वह मुझे कहती कि घर में बच्चे होते हैं इसलिए मैं आपको घर पर नहीं बुला सकती। मैंने उन्हे कहा आप मेरे पास ही आ जाइए लेकिन वह मुझे तड़पाती रहती थी परंतु वह मुझे कितने दिन तक तड़पाती एक दिन मैंने उन्हें अपने घर पर बुला लिया। मैं घर पर अकेला ही रहता था जब वह मेरे पास आई तो मैंने उन्हें अपनी गोद में बैठा लिया और जब मैंने उन्हें गोद में बैठाया तो उनकी गांड से मेरा लंड टकराने लगा था और मुझे भी अच्छा लग रहा था। काफी देर तक मैंने उनके होठों को अपने होठों में लेकर चूमा और गर्मि बढ़ती ही जा रही थी हम दोनों के चुम्मा चाटी के बाद मैंने जब उनके ब्लाउज को खोला तो उनके स्तन मेरे सामने थे। मै अपने हाथो से उनके स्तनों को दबाने लगा जब मैंने उनके स्तनो को मुंह में लिया तो बबीता को भी मजा आने लगा और मुझे भी अच्छा लग रहा था।

मैंने उनके बड़े स्तनों को बहुत देर तक चूसा और उनके स्तनों से मैंने पानी निकालकर रख दिया था उनके स्तनों से खून निकलने लगा था और वह तड़पने लगी थी। वह अपनी चूत के अंदर उंगली कर रही थी और मैंने जब उनकी चूत के अंदर अपनी उंगली को डाला तो वह मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लग रहा है। मैंने उनकी चूत के अंदर बाहर अपनी उंगली को करना जारी रखा और उन्हें बहुत ही मजा आ रहा था उनकी चूत गिली हो चुकी थी और गरम भी हो चुकी थी। उनकी चूत से गर्मी इतनी ज्यादा बाहर निकलने लगी थी जैसे ही उनकी चूत के अंदर मेरा लंड प्रवेश होने लगा तो वह खुश होने लगी। वह मुझसे लिपट चुकी थी मेरा लंड उनकी चूत के अंदर जाते ही वह चिल्लाने लगी और वह बड़ी तेज आवाज मे सिसकिया ले रही थी मैंने अपने हाथ को उनके मुंह पर रखते हुए कहा कि आप आराम से सिसकिया लिजिए कही कोई आ ना जाए लेकिन वह तो बड़ी तेज आवाज म सिसकिया ले रही थी। उनकी सिसकियां इतनी तेज होती कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा माल अभी गिर जाएगा। मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन काफी देर तक ऐसा करने के उपरांत जब मेरा वीर्य बाहर गिरने वाला था तो मैंने अपने वीर्य को बबीता जी की योनि के अंदर ही प्रवेश करवा दिया और अपने लंड को बाहर निकाल कर मैंने अपने लंड को बबीता के मुंह मे डाल दिया।

उन्होंने मेरे लंड को बहुत ही अच्छे से चूसा और मुझे उन्होंने पूरा मजा दिया काफी देर ऐसा करने के बाद जब मेरे लंड दोबारा से तन कर खड़ा हुआ तो उनकी चूत से टपकता हुआ वीर्य अब भी टपक रहा था। मैंने अपने लंड को उनकी गांड पर सटाते हुए अंदर की तरफ को धकेलना शुरू कर दिया था। मैंने जब अपने लंड को उनकी गांड मे घुसाया तो वह चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा गर्मी महसूस हो रही है। मैंने बबीता की गांड के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया था वह कहने लगी तुमने तो आज मेरी पूरे गांड फाड दी है। मैंने बबीता से कहा कि यही तो मेरा अंदाज है मै ऐसे ही गांड मारता हूं अब उनकी गांड के अंदर बाहर मेरा लोड आसानी से हो रहा था क्योंकि उनकी गांड क चिकनाई बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी और गांड की चिकनाई बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मेरा लंड आसानी से गांड के अंदर बाहर हो रहा था जब मेरा वीर्य निकलने वाला था तो मैंने अपने लंड को बबीता के मुंह के अंदर डाला और आपने वीर्य को बबीता के मुंह के अंदर घुसा दिया उन्होने सब चाट कर साफ कर दिया था।


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