भाभी की आंखों में हवस की आग


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मेरा नाम सुमित है मैं मैनपुरी का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 27 वर्ष है। मैं अपने पिताजी के साथ ही उनका कारोबार संभालता हूं। मैं काफी समय से उनके साथ ही काम कर रहा हूं। हालांकि मैं अपने पिताजी के साथ काम करना नहीं चाहता था लेकिन उनकी जिद की वजह से मुझे उनके साथ ही काम करना पड़ा। मैंने दिल्ली से कॉलेज किया है और दिल्ली से मैंने अपने लॉ की पढ़ाई की थी। मैं आगे इसी फील्ड में काम करना चाहता था लेकिन मेरे पिताजी ने मुझे मना कर दिया। वह कहने लगे कि तुम मेरा कारोबार संभालो क्योंकि तुम ही घर में एकलौते हो और मेरा काम भी अच्छा चलता है इसीलिए तुम्हें ही यह कारोबार संभालना चाहिए। मैंने भी उनके साथ ज्यादा इस बारे में बात नहीं की क्योंकि उन्होंने ही मुझे दिल्ली में कॉलेज पढ़ने के लिए भेजा था इसलिए मैं भी उन्हें मना ना कर सका और उनके साथ काम में लग गया। एक बार मैं दिल्ली कुछ काम से गया हुआ था। जब मैं दिल्ली गया तो मुझे अपने दोस्त प्रकाश का ध्यान आया। मैंने सोचा कि मुझे प्रकाश से मिलना चाहिए क्योंकि मैं प्रकाश से काफी समय से मिला नहीं था और उसके भैया की शादी में भी नहीं जा पाया था।

मैंने प्रकाश को फोन कर दिया और कहा कि मैं दिल्ली आया हुआ हूं। वह बहुत ही खुश हुआ और कहने लगा तुम इतने समय बाद दिल्ली आ रहे हो लेकिन तुमने मुझे पहले फोन नहीं किया। जब तुम जल्दी पहुंच गए तब तुम फोन कर रहे हो। मैंने उससे कहा दोस्त अब तुम यह सब बातें छोड़ो। तुम यह बताओ कि तुम मुझे कहां मिल रहे हो। वह मुझे कहने लगा मैं तुमसे मिलने नहीं आ रहा हूं तुम्हे मेरे घर ही आना पड़ेगा। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें 5 मिनट बाद फोन करता हूं। मैं सोचने लगा की मैं प्रकाश के घर जाऊंगा तो वह मुझ पर बहुत गुस्सा होगा क्योंकि उसने मुझे अपने भैया की शादी में भी बुलाया था लेकिन मैं उस वक्त नहीं जा पाया। उस वक्त हमारे घर में कुछ फैमिली प्रॉब्लम चल रही थी इसलिए मैं नहीं जा पाया। मैंने जब उसे 5 मिनट बाद फोन किया और उसे कहा की ठीक है मैं तुम्हारे घर आ रहा हूं।

जब मैं दिल्ली में पढ़ता था तो उसके घर पर मेरा आना जाना लगा रहता था और उसके परिवार के सारे सदस्य मुझे पहचानते हैं। मैं प्रकाश के घर पहुंच गया। मैं जब प्रकाश के घर पहुंचा तो मैंने रास्ते से एक स्वीट शॉप से मिठाई पैक करवा लिया और मैं प्रकाश के घर चला गया। जब मैं प्रकाश से मिला तो वह मुझसे मिलकर बहुत खुश हुआ और कहने लगा तुम इतने वर्षों बाद मुझे मिल रहे हो। तुमसे मिलकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैंने उसे कहा मुझे भी तुमसे मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है। प्रकाश और मैं बैठे हुए थे हम दोनों बातें कर रहे थे। इतने में उसकी मम्मी भी आ गई। उसकी मम्मी कहने लगी अरे बेटा सुमित तुम कैसे हो। तुम तो कई वर्षों बाद दिल्ली आ रहे हो। मैंने कहा आंटी ऐसी कोई बात नहीं है अब पिताजी के साथ ही उनका कारोबार संभाल रहा हूं इसलिए आना संभव नहीं हो पाता। अभी मेरा दिल्ली आना हुआ तो सोचा आप लोगों से मिलता हुआ चलूं। आंटी मुझे कहने लगी तुम्हें आज यहीं रुकना होगा क्योंकि तुम्हारी भाभी का बर्थडे है। मैंने दिल ही दिल सोचा कि यह तो बड़ी मुसीबत हो गई मुझे अब यहीं रुकना पड़ेगा। मैं वहां रुकने के मकसद से नहीं गया था लेकिन अब मुझे वहां रुकना ही पढ़ रहा था। आंटी भी अपने रूम में चली गई। प्रकाश और मैं बात करने लगे। प्रकाश मुझसे पूछने लगा तुम शादी में क्यों नहीं आए। मैं तुम्हारा काफी इंतजार करता रहा। मैंने उसे बताया कि उस वक्त मेरी फैमिली में थोड़ा प्रॉब्लम चल रही थी। पापा ने एक से जमीन ली थी और उसको लेकर बहुत ही भागा दौड़ी करनी पड़ी क्योंकि उस जमीन का विवाद होने लगा था इस वजह से मैं दिल्ली नहीं आ पाया। वह कहने लगा चलो कोई बात नहीं लेकिन तुमने यह अच्छा किया कि इस वक्त तुम दिल्ली आ गए। हम दोनों लगभग आधे घंटे तक बैठ कर बात कर रहे थे। प्रकाश मुझे कहने लगा मैं तुम्हें अपनी भाभी से मिलवाता हूँ। मैंने उसे कहा भाभी कहां पर है। वह कहने लगा भाभी ऊपर वाले फ्लोर हैं। जब से भैया की शादी हुई है उसके बाद से वह लोग ऊपर वाले फ्लोर में रहने के लिए चले गए हैं।

वह मुझे अपनी भाभी से मिलवाने ले गया। उसने मेरा अपने भाभी के साथ परिचय करवाया। उनका नाम आशा है। वह बात करने में बहुत ही सभ्य और सुशील लग रही थी। हम लोग कुछ देर वहीं पर बैठ गए और उनके साथ खूब हंसी मजाक करने लगे। प्रकाश कहने लगा यह मेरे घर के सदस्य जैसा है लेकिन एक बात से मैं इससे नाराज हूं कि यह शादी में नहीं आ पाया। आशा भाभी भी कहने लगे कि आप शादी में नहीं आ पाए। मैंने उन्हें कहा कि हां उस वक्त मेरे घर में फैमिली मैटर चल रहा था इसलिए मैं आ नहीं पाया। घर में मैं इकलौता हूं और पापा का भी कारोबार हैं इस वजह से मेरा आना संभव नहीं हो पाया लेकिन इस वक्त आप लोगों से मिलने मैं आ गया तो मुझे आपसे मिलकर बहुत खुशी हुई। मैंने उनसे पूछा कि भैया कब आ रहे हैं। वह कहने लगी कि तुम्हारे भैया कल सुबह आएंगे। मुझे उनकी आंखों में हवस दिखाई दे रही थी लेकिन प्रकाश मेरा अच्छा दोस्त था इसलिए मैंने उसे ज्यादा बात नहीं की। यदि मैं उससे उसकी भाभी के बारे में बात करता तो शायद उसे बुरा लग जाता। भाभी मुझे ऐसे घूर रही थी जैसे कि वह मेरे लंड को खाना चाहती हो। मैं भी बहुत शातिर खिलाड़ी हू इसलिए मैं समझ गया कि उन्हें मुझसे क्या चीज चाहिए। जब हम लोग उनसे बात कर के नीचे लौट रहे थे तो मैंने भी अपना मोबाइल नंबर एक पेपर में लिख कर वहीं छोड़ दिया।

जब शाम के वक्त उन्होंने मुझे मैसेज किया और कहने लगी ऊपर आ जाओ। उन्होंने मुझे ऊपर बुला लिया। मैंने उन्हें कहा प्रकाश और आंटी घर पर है। वह कहने लगी तुम उसकी चिंता मत करो। वह इतनी तेज दिमाग है कि उन्होंने उन दोनों को मार्केट भिजवा दिया था। वह सामान लेने के लिए मार्केट चले गए। अब हम दोनों घर पर थे। मैं उनकी शातिर चाल को समझ गया। उन्होंने मेरे सामने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैंने जब उनके नंगे बदन को देखा तो मैं अपने आपको नहीं रोक पाया। जैसे ही मैंने उनकी ब्रा को खोलना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी इतना देर क्यों कर रहे हो जल्दी से काम करो। लगता है तुम इन चीजों में नए हो। मैं समझ गया यह अभी तक अपनी चूत में कई लंड समा चुकी है। मैंने भी देरी नहीं की और जल्दी से उनके बदन का रसपान करना शुरू कर दिया। काफी देर तक मै उनके स्तनों का रसपान करता रहा।

मैंने जब अपने लंड को उनके चिकनी और मुलायम स्तनों पर लगाया तो वह और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगी। मै काफी देर तक ऐसा ही करता रहा। जब मैंने अपने लंड को उनके मुंह के अंदर डाला तो वह मुझे कहने लगी तुम बड़ी तेजी से मेरे मुंह के अंदर अपने लंड को डालो। मैंने भी तेजी से उनके मुंह में अपने लंड को डालना शुरू किया तो वह मेरे लंड को मजे मे चूस रही थी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि उन्होंने कई लंड अपने मह मे लेकर उनका रसपान किया हो। वह मुझे कहने लगी तुम पहले व्यक्ति हो जिससे मैं इतनी देर तक अपने स्तनों का रसमान करने के लिए कह रही हू। उन्होंने बड़े अच्छे से मुझसे अपने निप्पल को चुसवाया। जब तक उनकी चूत ने पानी नही छोड़ा दिया। वह मुझे कहने लगी जल्दी से अपने लंड को मेरी चूत में डाल दो। उन्होंने अपनी चूत में मेरे लंड को लगाना शुरू कर दिया। वह इतने  अच्छे से अपनी चूत मे मेरे लंड को रगड रही थी। उनकी चूत ने पानी छोड दिया था और उनकी चूत चिकनी हो गई। मेरा लंड भी कडक हो चुका था। मैंने जैसे ही धक्का देते हुए अपने लंड को उनकी चूत के अंदर प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड बड़ा ही अच्छा और मोटा लंड है। जैसे जैसे मैं अपने लंड को अंदर बाहर करता तो उन्हें अच्छा लगता। जब समय बीतता गया तो उनके मुंह से सिसकियां भी बाहर की तरफ को निकलने लगी। उनके साथ मे इतनी तेज गति से सेक्स कर रहा था। वह सिसकियां ले रही थी और वह सिसकिया मेरे कानों तक जाते ही। मुझे अपनी ओर खींचने लगती। मैंने उनके पैरों को अपने कंधों पर रखते हुए उनकी चूतड़ों पर बड़ी तेज प्रहार किए लेकिन उनके अंदर इतनी ज्यादा गर्मी थी कि उनका तरल पदार्थ बहुत तेज गति से बाहर निकल रहा था। जिससे की मेरा लंड उनके तरल पदार्थ को झेलने में सक्षम नहीं था। मेरा वीर्य पतन भी हो गया।


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