मैने देखा उसका लंड खड़ा था


Antarvasna, kamukta: कुछ दिनों पहले दीदी घर पर आई थी जब दीदी घर पर आई तो उस दौरान हम लोगों ने काफी अच्छा समय साथ में बिताया फिर दीदी अपने ससुराल चली गई। दीदी कुछ दिनों पहले ही घर पर आई थी और सब कुछ ठीक था लेकिन जब एक दिन दीदी का मुझे फोन आया तो दीदी कहने लगी कि आशा मैं घर आ रही हूं। उन्होंने मां से कुछ भी नहीं कहा था और वह घर पर आ गई अचानक से दीदी घर पर आई तो मां भी काफी परेशान हो गई की अभी कुछ दिनों पहले ही तो दीदी घर पर आई थी। मैं भी यही सोच रही थी आखिर ऐसी क्या बात हो गई मुझे लगा था कि शायद जीजा जी के साथ दीदी का झगड़ा हो गया होगा लेकिन बात तो कुछ और ही थी। जब दीदी ने हमे यह बात बताई की जीजाजी किसी और ही लड़की से शादी कर रहे हैं तो हम यह बात सुनकर चौक गए मां तो बेहोश ही हो गई थी। पापा ने मां को पानी पिलाया और मां को आराम करने के लिए कहा लेकिन हमारी तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह सब अचानक से कैसे हो रहा है जब दीदी ने पूरी बात बताई तो सारा माजरा समझ में आ गया।

जीजा जी पहले से ही किसी लड़की को प्यार करते थे और जीजा जी दीदी से कभी शादी करना ही नहीं चाहते थे दीदी की शादी को अभी सिर्फ एक वर्ष ही बीता है और दीदी के ऊपर इतना बड़ा दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। इससे घर में सब लोग बहुत ही ज्यादा उदास थे और सबसे ज्यादा उदास तो दीदी थी जिनके साथ ही ऐसा हुआ था। पापा ने उसके बाद जीजा जी से भी बात की लेकिन वह तो जैसे किसी की बात सुनने को तैयार ही नहीं थे पापा भी बेबस थे पापा के पास भी कोई रास्ता नहीं था। दीदी घर पर आ चुकी थी और घर का माहौल बिल्कुल भी ठीक नहीं था घर में कोई किसी से भी बात नहीं किया करता काफी समय तक ऐसा ही चलता रहा दीदी अब घर पर ही रहने लगी थी लेकिन दीदी ने फैसला किया कि वह कुछ करना चाहती हैं और उन्होंने जॉब करनी शुरू कर दी। वह जॉब करने लगी थी तो उनका मन भी ऑफिस में लगा रहता घर में धीरे धीरे सब कुछ ठीक होने लगा था लेकिन जीजाजी ने दीदी को स्वीकार नहीं किया और दीदी हमारे साथ ही रहने लगी थी। हालांकि रह रहकर यह बात कभी कबार आ ही जाती थी और इस बात से पापा मम्मी और दीदी बहुत परेशान हो जाया करते थे।

मुझे भी लगने लगा कि जीजा जी तो पहले बहुत ही अच्छे थे और सब कुछ कितने अच्छे से चल रहा था दीदी भी बहुत खुश थी लेकिन अचानक से ऐसा क्या हुआ की उनकी जिंदगी में पूरी तरीके से भूचाल आ गया। मैंने जब जीजा जी से इस बारे में बात की और उनसे मैंने काफी विनती की कि जीजा जी दीदी को अपना ले लेकिन उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया और कहने लगे कि देखो आशा अब यह संभव नहीं है मैं तुम्हारी बहन को अपना नहीं सकता। मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा था लेकिन दीदी अब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी थी और उनकी लाइफ कुछ समय बाद ठीक होने लगी। उनकी जॉब के दौरान ही गौतम के साथ मुलाकात हुई तो उन दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी और वह दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे जब यह बात मम्मी पापा को पता चली तो उन्होंने दीदी को बहुत समझाया और कहा कि क्या गौतम तुम्हारा साथ दे पाएगा। दीदी ने कहा हां गौतम मेरा साथ दे पाएगा दीदी ने गौतम को जब घर पर बुलाया तो पापा गौतम से मिले और उन्हें गौतम काफी अच्छे लगे। उन्होंने गौतम से पूछा कि क्या तुम्हें मीनाक्षी ने सब कुछ बता दिया है तो वह कहने लगे कि हां मुझे मीनाक्षी ने सब कुछ बता दिया था। दीदी ने उन्हें अपने शादीशुदा जिंदगी के बारे में बता दिया था और उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं थी गौतम के परिवार वालों ने भी मीनाक्षी दीदी को स्वीकार कर लिया था और उन दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली जिसके बाद वह दोनों अब साथ में रहने लगे। सब कुछ पहले जैसा ही होने लगा था दीदी को गौतम का सहारा मिल चुका था इसलिए दीदी अब बहुत खुश थी और गौतम के साथ अपनी वह शादीशुदा जिंदगी को अच्छे से जी रही थी जब भी वह घर आती तो हमेशा वह गौतम के बारे में ही बात करती। मेरा भी सरकारी नौकरी में सिलेक्शन हो चुका था और जब मेरी जॉइनिंग भोपाल में हुई तो मेरे पापा मम्मी चिंतित हो गए और वह कहने लगे कि आशा बेटा तुम भोपाल में कैसे रहोगी।

मैंने उनसे कहा कि मां देखो अब भोपाल में तो रहना ही पड़ेगा और मैं अब भोपाल जाने की तैयारी करने लगी भोपाल में मैं किसी को भी नहीं जानती थी लेकिन पापा के एक पुराने दोस्त है पापा ने उन्हें फोन किया तो पापा ने उन्हें बताया कि मेरी बेटी भोपाल आ रही है उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं वह कुछ दिन हमारे साथ रह लेगी। मैं जब भोपाल पहुंची तो पापा के दोस्त के घर पर मैं कुछ दिन तक रुकी उनके परिवार के साथ मुझे काफी अच्छा लगा और फिर मैंने अपने लिए घर देख लिया था। मैं अब अकेले रहने लगी थी मेरी जॉब भी अच्छे से चल रही थी और मैं पापा और मम्मी से हमेशा ही बात किया करती। एक दिन मैं अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रही थी तो दीदी का मुझे फोन आया और दीदी ने मुझे बताया कि वह भी कुछ दिनों के लिए भोपाल आ रही हैं मैं बहुत खुश हो गई और मैंने दीदी से कहा लेकिन तूम भोपाल कब आ रही हो। उन्होंने कहा बस कुछ दिनों बाद ही मैं आ जाऊंगी और थोड़े दिनों बाद दीदी भोपाल आ गई मैं दीदी से मिलकर बहुत खुश हुई दीदी कुछ दिनों के लिए मेरे साथ ही रहने वाली थी और मैं बहुत ज्यादा खुश थी। मैंने दीदी से पूछा कि वह खुश तो है ना तो उन्होंने मुझे बताया कि हां गौतम उनका बहुत ध्यान रखते हैं और उनके जीवन में अब सब कुछ ठीक है।

दीदी अभी भी जॉब करती हैं उन्होंने कुछ दिनों की छुट्टी ले ली थी जिस वजह से वह मुझसे मिलने के लिए आई थी मैं भी दीदी के साथ समय बिता कर बहुत खुश थी लेकिन थोड़े दिनों बाद दीदी भी वापस लौट गई और मैं दोबारा से अकेली हो गई। दीदी के वापस लौट आने के बाद मुझे अकेलापन महसूस हो रहा था मैं भोपाल में अकेली थी रहती थी। पड़ोस में दो लड़के रहने के लिए आए और जब वह लोग रहने के लिए आए तो वह काफी शोर-शराबा किया करते जिससे कि मुझे काफी परेशानी होती थी। एक दिन मैंने उन्हें कहा आपके घर से काफी तेज आवाज आती हैं? उन्होंने मुझे कहा आज के बाद कभी भी आपको शोर सुनाई नहीं देगा। उनके घर पर अक्सर पार्टी होती रहती थी जिस वजह से उनके घर से शोर-शराबे की आवाज आती थी। मैंने उन दोनों को कई बार कहा लेकिन वह लोग अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे थे जिसे कि मैं बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी थी और एक दिन मैंने हमारी सोसायटी के सेक्रेटरी से इस बात की कंप्लेंट कर दी तब जाकर वह लोग कहीं ना कहीं अपनी हरकत से बाज आए। मुझे भी अब थोड़ा राहत मिल चुकी थी क्योंकि वह लोग बहुत ज्यादा शोर किया करते थे जिस से कि मुझे काफी परेशानी होती थी मैं यह सब बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी। उन दोनों मे से मुझे हर्षित बहुत ही अच्छा लगा हर्षित से मेरी बातचीत होने लगी और हर्षित मेरी काफी मदद भी कर दिया करता। कभी मुझे कुछ सामान की जरूरत होती तो मैं हर्षित को कह दिया करती और वह मेरे लिए वह सामान लेकर आ जाया करता। एक दिन हर्षित और मैं साथ में बैठ कर बात कर रहे थे उस दिन मेरी नजर जब हर्षित के लंड पर पड़ी तो उसका लंड खड़ा हो रहा था। मैंने उस दिन तो हर्षित से कुछ नहीं कहा परंतु मुझे यह बात तो पता चल चुकी थी कि वह मेरे साथ सेक्स करना चाहता है इसलिए मैं भी हर्षित को इस बात के लिए उत्तेजित करने लगी कि वह मेरे साथ सेक्स करे। एक दिन वह इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया कि उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया। जब उसने बिस्तर पर लेटाया तो वह मेरे होठों को चूमने लगा मैं भी उसके साथ किस कर के बहुत खुश थी और काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे को किस करते रहे।

मैं इतनी ज्यादा गरम हो गई कि मैंने अपनी चूत के अंदर उंगली डालनी शुरू की उसने भी मेरी सलवार के नाडे को खोलते हुए मेरी पैंटी के अंदर से मेरी चूत मे उंगली डाली तो मेरी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर निकल रहा था उसने मेरी पैंटी को उतार दिया और वह मेरी चूत को चाट रहा था तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। काफी देर तक उसने ऐसे ही मेरी चूत का रसपान किया मै इतनी ज्यादा खुश हो गई कि उसने मेरी चूत पर अपने लंड को लगा दिया उसने मेरी चूत पर अपने लंड को लगा दिया। मैंने उसे कहा तुम अंदर की तरफ धक्के दो और उसने जब मेरी चूत के अंदर तक धक्के दिए तो मेरी सील टूट चुकी थी और मेरी चूत के अंदर उसका लंड घुस चुका था। मैं अपने पैरों को खोल रही थी तो वह मुझे और भी तेजी से धक्के मारने लगा। वह मुझे जिस गति से धक्के मार रहा था उससे मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ रही थी और मेरे लिए वह अलग फीलिंग थी।

मैं अपने पैरों को खोल रही थी और वह मुझे बड़ी तेज गति से ऐसे ही चोद रहा था उसने ऐसे ही मेरी चूत मारी। जब वह मुझे धक्के मार रहा था तो मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो जाया करती और उसे अपनी बाहों में लेती। जब उसने मुझे डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया तो मेरी चूत से उसका लंड टकरा रहा था। जब मै अपनी चूतडो को उसके लंड से टकराती तो उनसे एक अलग ही प्रकार की आवाज पैदा हो रही थी। वह मुझे कहने लगा आपकी चूत मारकर आज मजा ही आ गया। वह मेरी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था तो उसे बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था और काफी देर तक उसने मेरी चूत के मजे लिए। मै अब पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी मेरी चूत से पानी निकलने लगा था जिस वजह से उसने अपने वीर्य को मेरी चूत में गिरा दिया। हर्षित के साथ मेरी बड़ी अच्छी बातचीत हो चुकी थी उसके बाद वह मेरी हर बात माना करता क्योंकि उसे मेरे साथ सेक्स करना होता था मैं उसकी इच्छा को पूरा कर दिया करती और वह मेरा हर काम कर दिया करता।


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