मखमली चूत और कठोर लंड का टकराव


Antarvasna, kamukta: दीदी मुझे कहती हैं कि सूरज तुम मुझे मेरे ऑफिस तक छोड़ देना मैंने दीदी को कहा ठीक है दीदी मैं आपको आपके ऑफिस तक छोड़ दूंगा दीदी को मैंने उनके ऑफिस छोड़ा और मैं अपने कॉलेज चला गया। मैं जब अपने कॉलेज पहुंचा तो मेरे दोस्त मुझे कहने लगे कि सूरज आज तुम कॉलेज में देर से आ रहे हो तो मैंने उन्हें कहा मैं दीदी को छोड़ने के लिए चला गया था इसलिए आने में देरी हो गई। कॉलेज में माधुरी भी पड़ती है माधुरी जब भी मुझे देखती है तो मुझे अच्छा लगता है लेकिन मैं माधुरी को कभी भी अपने दिल की बात कह ना सका कितने वर्ष हो गए परंतु मैंने माधुरी से कभी ज्यादा बात की ही नहीं। माधुरी को जब भी मैं देखता हूं तो मुझे लगता है कि शायद मैं उससे बात कर ही नहीं पाऊंगा इस वजह से मैं माधुरी से बात भी नहीं कर पाया और मेरा एक तरफा प्यार बस मेरे अंदर तक ही सीमित होकर रह गया। माधुरी को एक दिन अपने किसी काम से कहीं जाना था तो माधुरी ने मुझे कहा कि सूरज क्या तुम मुझे मेरे घर तक छोड़ दोगे। पहली बार ही माधुरी ने मुझसे आकर कुछ कहा था तो मैं उसे कैसे मना कर सकता था मैंने माधुरी को कहा ठीक है मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक छोड़ देता हूं।

मैंने माधुरी को उसके घर तक छोड़ा और रास्ते में जब उसने मेरे कंधे पर अपने हाथ को रखा तो मेरी दिल की धड़कन बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी लेकिन मैं फिर भी माधुरी से बात नहीं कर पाया। जब मैंने माधुरी को उसके घर पर छोड़ा तो उसने मुझे धन्यवाद कहा और कहने लगी कि चलो घर में मैं तुम्हें अपने मम्मी पापा से मिलवाती हूं मैंने माधुरी को कहा नहीं माधुरी कभी और उनसे मिल लूंगा और फिर मैं अपने घर चला गया। हम लोगों को कॉलेज खत्म हो चुका था और मैं अब अपनी नौकरी की तैयारी कर रहा था उसी समय मेरे दोस्त का मुझे फोन आया और उसने मुझे बताया कि माधुरी की जॉब लग चुकी है और वह जॉब करने के लिए मुंबई जा रही है। मैं कभी मुंबई के बारे में सोच भी नहीं सकता था क्योंकि मैं छोटे से शहर का रहने वाला एक लड़का हूँ और भला मैं माधुरी को कैसे अपने दिल की बात कह पाता यह भी मुझे समझ नहीं आ रहा था।

मैंने माधुरी को अपने दिल की बात भी नहीं कहीं और ना ही मैंने माधुरी से कुछ कहा माधुरी अब मुंबई जा चुकी थी मैं अभी भी बनारस में ही था लेकिन मेरे दिल में अभी भी माधुरी के लिए वही प्यार था जो कि पहले था मैं सोचने लगा कि काश मैं माधुरी को अपने दिल की बात कह पाता। कुछ समय के लिए मैंने बनारस में ही एक छोटी मार्केटिंग की नौकरी ज्वाइन कर ली जब उस नौकरी को मैंने जॉइन किया तो करीब 6 महीने तक मैंने वहां पर काम किया लेकिन मुझे लगा कि शायद मैं यहां पर काम नहीं कर पाऊंगा इसलिए मैंने वहां से काम छोड़ दिया। अब मैं घर पर ही था पापा और मम्मी का मुझ पर दबाव था वह लोग कहने लगे कि सूरज बेटा तुम अपने भविष्य के बारे में कुछ सोचते भी हो या नहीं लेकिन मैं उन्हें कहने लगा कि मैं जरूर कुछ ना कुछ कर लूंगा आप लोग निश्चिंत रहें परंतु मुझे भी यह बात मालूम थी कि यह सब इतना आसान होने वाला नहीं है इसके लिए मुझे कई गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। मेरी अंग्रेजी पहले से ही बहुत तंग थी इसलिए मैंने अपनी अंग्रेजी को सुधारने के लिए एक कोचिंग सेंटर में अंग्रेजी सीखने का फैसला किया। मैं अंग्रेजी क्लास जाने लगा था धीरे-धीरे मेरे अंदर अब वह कॉन्फिडेंस आने लगा था मुझे लगा कि मुझे अब नौकरी के लिए किसी अच्छी जगह पर ट्राई करना चाहिए। एक दिन मैंने अखबार में देखा अखबार में एक मुंबई की कंपनी का इश्तेहार था मुंबई के नाम सुनते ही मेरे दिमाग में सिर्फ माधुरी का चेहरा आया मैंने सोचा कि अगर मेरी नौकरी इस कंपनी में लग जाती है तो क्या मैं माधुरी को मिल पाऊंगा लेकिन फिलहाल तो मेरा सबसे पहला उद्देश्य नौकरी हासिल करना था। जब मैं उस कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए गया तो वहां पर मेरा सिलेक्शन भी हो गया मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी मुझे तो लग रहा था कि शायद मेरा सिलेक्शन होगा ही नहीं परन्तु अब मेरे पास एक अच्छी नौकरी थी और मैं मुंबई भी जाने वाला था। मेरे दिल में अभी भी माधुरी के लिए वही प्यार था मैं जब मुंबई गया तो मैं सिर्फ यही सोचने लगा कि क्या मैं माधुरी से मिल पाऊंगा।

मुझे जॉब करते हुए करीब 3 महीने हो चुके थे इन 3 महीनों में मेरे कई दोस्त बने लेकिन अभी तक मुझे माधुरी का कोई अता पता नहीं चल पाया था। मैं माधुरी के बारे में जानना चाहता था मैंने अपने दोस्तों को फोन किया और उन्हें कहा कि क्या तुम्हारे पास माधुरी का नंबर है लेकिन मुझे माधुरी का नंबर कहीं से भी नहीं मिल पाया और ना ही मुझे यह पता था कि माधुरी रहती कहां है। मैं अपने ऑफिस से जब फ्री होता तो अक्सर मैं शाम के वक्त टहलने के लिए निकल जाया करता था लेकिन मुझे इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि माधुरी से एक दिन मेरी मुलाकात हो ही जाएगी। जब माधुरी मुझे मिली तो माधुरी ने मुझे देखते ही कहा सूरज तुम यहां क्या कर रहे हो तो मैंने उसे कहा मैं तो यहीं नौकरी कर रहा हूं माधुरी मुझे कहने लगी चलो यह तो बहुत खुशी की बात है। माधुरी भी बहुत खुश थी और मुझे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि माधुरी से मेरी बात हो पाएगी माधुरी ने मुझसे बड़ी खुलकर बात की लेकिन माधुरी बदल चुकी थी। माधुरी की वेशभूषा और उसके बात करने का तरीका सब कुछ बदल चुका था लेकिन मुझे माधुरी से बात कर के अच्छा लगा मैंने माधुरी का नंबर ले लिया क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि अब मैं कोई गलती करूं मैं इस मौके को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहता था।

मेरे अंदर भी अब कॉन्फिडेंस आ चुका था और मैं माधुरी को अपने दिल की बात तो कहना ही चाहता था आखिरकार माधुरी को मैं दिल ही दिल जो चाहता था उसके लिए मैंने पूरी तरीके से सोच लिया था कि मैं माधुरी को प्रपोज कर के ही रहूंगा। माधुरी और मेरी मुलाकात होती ही रहती थी जब भी हम दोनों मिलते तो मुझे माधुरी से मिलकर अच्छा लगता और मुझे इस बात की खुशी होती कि कम से कम मैं माधुरी से मिलता रहता हूं। माधुरी से मिलना मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था और एक दिन मैंने माधुरी को डिनर के लिए इनवाइट किया और उसे अपने दिल की बात कह दी शायद माधुरी को यह बात अच्छी नहीं लगी। माधुरी ने उस वक्त तो मुझे कुछ नहीं कहा परंतु कुछ दिनों बाद माधुरी का फोन मेरे नंबर पर आया और माधुरी ने मुझे बड़े ही प्यार से कहा कि मुझे तुमसे मिलना है। मैं खुश हो गया और मुझे यह समझ आ गया कि माधुरी मुझसे बात करना चाहती है मैं माधुरी को मिलने के लिए चला गया। जब मैं माधुरी से मिलने के लिए गया तो माधुरी ने उस दिन मुझे गले लगा लिया। जब उसने मुझे गले लगाया तो मैं भी अपने आपको रोक ना सका मैंने माधुरी के होठों को चूम लिया माधुरी को मैंने वही जमीन पर लेटा दिया और उसके होठों का मैं रसपान करने लगा उसके मुलायम होठों को मैंने बहुत देर तक अपने होठों में लेकर चूसा हम दोनों के बदन पूरी तरीके से गर्म हो चुके थे। काफी देर तक चुम्मा चाटी के बाद हम दोनों रह नहीं पा रहे थे मैंने माधुरी को कहा तुम बहुत अच्छी हो माधुरी मुझे कहने लगी सूरज आज तुमने मेरे बदन की गर्मी को बढ़ा दिया है माधुरी ने भी कभी सोचा नहीं था हम दोनों जब मिलेंगे तो एक दूसरे के साथ चूत चुदाई का खेल खेलेंगे। मैंने माधुरी की योनि पर अपनी उंगली को लगाया तो उसकी योनि से गिलापन बाहर की तरफ हो निकल रहा था और वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थी।

मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपनी उंगली को डाला तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने अपने मुंह के अंदर उसे ले लिया, वह मेरे लंड को संकिग करने लगी। वह  जिस प्रकार से मेरे लंड को अपने गले के अंदर तक ले रही थी मुझे बहुत मजा आ रहा था मेरा सपना सच हो चुका था मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि यह सब इतने जल्दी हो जाएगा क्योंकि मुझे इस बात की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी मैं माधुरी के साथ सेक्स का मजा ले पाऊंगा। माधुरी ने मेरे लंड को चूस कर पूरा गीला कर दिया था अब उसने अपने दोनों पैरों को खोला तो मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया उसकी चूत के अंदर मेरा मोटा लंड जैसे ही घुसा तो वह चिल्ला उठी और उसकी मादक आवाज मेरे कान में जाने लगी।

माधुरी सील पैक थी मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी चूत के अंदर डाला तो उसकी सील टूट चुकी थी उसकी चूत के अंदर से खून बाहर की तरफ निकलने लगा था। मैंने उसे अब लगातार तेजी से धक्के देने शुरू किए और जिस प्रकार से मैंने उसे धक्के मारे उससे वह कहने लगी सूरज आज मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने उससे कहा मजा तो मुझसे भी बहुत आ रहा है और जिस प्रकार से हम दोनों ने सेक्स का मजा लिया उस से हम दोनो के बदन से पसीना आने लगा था और थोड़ी देर बाद मैंने माधुरी को घोड़ी बनाया और उसकी चूत के अंदर लंड को डाला तो वह चिल्ला उठी। उसकी चूत के अंदर मेरा लंड घुस चुका था मैं लगातार तेजी से उसकी नर्म और मुलायम चूत का मजा ले रहा था मैं  जब उसकी चूतड़ों पर प्रहार करता तो उसकी चूतड़ों का रंग लाल हो जाता वह मेरा साथ बड़े ही अच्छे से देती मैं उसे बहुत तेजी से धक्के मारता। मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर होता तो वह भी उत्तेजित हो जाती है वह मुझे कहती मैं ज्यादा देर तक अब रह नहीं पाऊंगी मेरा भी गरमा गरम वीर्य उसकी चूत के अंदर गिरा। उसने मुझे गले लगाते हुए कहा आई लव यू सूरज यह बात सुनने के लिए मेरे कान तरस गए थे और मैंने उसे गले लगाते ही कहा आई लव यू टू।


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