मुंह मे वीर्य उडेल दिया


Antarvasna, kamukta: मैं अपने ऑफिस मीटिंग के सिलसिले में लखनऊ जाने वाला था मैं दिल्ली मैं नौकरी करता हूं लखनऊ से मेरी काफी यादें जुड़ी हुई है क्योंकि बचपन में मैंने लखनऊ में काफी समय बिताया है और अपने स्कूल की पढ़ाई भी मैंने लखनऊ से ही पूरी की थी। जिस जगह हम लोग रहा करते थे मैं चाहता था कि मैं वहां पर जाकर एक बार तो देख कर जरूर आऊं। मैंने अपनी पत्नी काजल को कहा काजल तुम मेरा सामान जल्दी से पैक कर दो तो काजल ने मुझे कहा कि हां मैं तुम्हारा सामान अभी मैं पैक कर देती हूं काजल ने मेरी काफी मदद की और उसने अब मेरा सामान पैक कर दिया था। काजल मुझे कहने लगी कि चलो रोहन तुम खाना खा लो अब काफी देर भी हो चुकी है मैंने काजल से कहा कि क्या पापा और मम्मी ने खाना खा लिया है तो वह कहने लगी की उन्होंने तो खाना खा लिया है अब तुम भी खाना खा लो उसके बाद तुम्हें कल सुबह जल्दी भी तो जाना है। मैंने काजल को कहा ठीक है मैं खाना खा लेता हूं मैंने और काजल ने साथ में खाना खाया और उसके बाद हम दोनों सो गए सुबह मुझे जल्दी जाना था इसलिए मैं सुबह जल्दी उठ चुका था।

काजल भी सुबह जल्दी उठी और वह मुझे कहने लगी कि रोहन मैं कुछ दिनों के लिए पापा और मम्मी के पास रहने के लिए चली जाऊंगी वह लोग भी घर पर अकेले हैं मैंने काजल को कहा ठीक है तुम उनके पास चले जाना। काजल के भैया की पोस्टिंग अभी कुछ समय पहले ही हैदराबाद हो चुकी थी इसलिए उसके मम्मी पापा घर पर अकेले ही थे तो मैंने काजल को कहा तुम अपने पापा और मम्मी के पास चले जाना काजल मुझे कहने लगी कि हां मैं उनके पास कुछ दिनों के लिए रहने के लिए चली जाऊंगी। काजल प्राइवेट स्कूल में टीचर है और कुछ दिनों के लिए स्कूल की छुट्टियां पढ़ने वाली थी इसलिए काजल चाहती थी कि वह अपने मम्मी पापा से मिले। मैं रेलवे स्टेशन तक ऑटो से चला गया मैं रेलवे स्टेशन पहुंचा तो वहां पर ट्रेन अभी तक आई नहीं थी लेकिन थोड़ी देर में ही ट्रेन आने वाली थी और जैसे ही ट्रेन आई तो मैंने अपना सामान ट्रेन में रखा और मैं अपनी सीट पर बैठ गया।

आसपास भी लोग आने लगे थे मैं भी अपनी सीट मैं बैठ चुका था और थोड़ी देर के बाद ही एक व्यक्ति मेरे सामने आकर बैठे उन्होंने मुझसे बात करनी शुरू की। पहले तो मुझे उनसे बात करना ठीक नहीं लग रहा था लेकिन जब पूरे रास्ते भर वह मुझसे बात करते रहे तो मेरा सफर पता नहीं कैसे कटा मुझे कुछ मालूम ही नहीं पड़ा और उसके बाद मैं लखनऊ पहुंचा। लखनऊ पहुंचते ही मैं होटल में चला गया और होटल में जाने के बाद मैंने वहां पर अपना सामान रखा और कुछ देर के लिए मैं आराम करना चाहता था मैं बिस्तर पर लेटा ही था कि मेरी आंख लग गई और जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कोई दरवाजे की डोर बैंड बजा रहा था। मैंने जब दरवाजा खोला तो मैंने सामने देखा कि एक होटल का कर्मचारी खड़ा था वह मुझे कहने लगा कि सर आपके लिए मैं खाना लगवा दूं तो मैंने उसे कहा कि नहीं थोड़ी देर बाद तुम खाना लगवा देना। थोड़ी देर बाद उसने खाना भिजवा दिया मैंने खाना खाया और उसके बाद मैंने काजल को फोन किया काजल से मैंने काफी देर तक बात की काजल मुझे कहने लगी कि रास्ते में तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं हुई मैंने उसे कहा नहीं मुझे भला रास्ते में क्या परेशानी होती। अगले दिन मैं अपनी मीटिंग के लिए चला गया वहां से जब मैं फ्री हुआ तो मैंने सोचा कि क्यों ना मैं वहां जाऊं जहां पहले हम लोग रहा करते थे मैं जब वहां पर गया तो वहां का नजारा पूरी तरीके से बदला हुआ था क्योंकि काफी वर्ष पुरानी बात भी तो हो गई थी लेकिन वहां जाकर मुझे काफी अच्छा लगा। जिस घर में हम लोग रहते थे जब वहां पर मैं उन लोगों से मिला तो उन्हें भी काफी अच्छा लगा उन्होंने मुझे कहा कि बेटा तुम खाना खा कर जाना तो मैंने उन्हें मना कर दिया और उसके बाद मैं वापस होटल लौट गया। मैं जब होटल वापस लौटा तो मैंने यह बात काजल को भी फोन पर बताई और पापा से भी उस दिन मैंने फोन पर बात की तो वह कहने लगे कि रोहन बेटा तुमने बहुत ही अच्छा किया जो तुम वहां चले गए। उन्होंने मुझसे पूछा कि बेटा क्या अभी भी वहां पड़ोस में मिश्रा जी रहते हैं तो मैंने उन्हें कहा वह अभी भी वहीं पड़ोस में रहते हैं उनसे भी मेरी मुलाकात हुई थी। हालांकि मैं उन लोगों से ज्यादा नहीं मिल पाया था लेकिन फिर भी उनसे मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा।

मैं लखनऊ ज्यादा दिनों तक नहीं रुकने वाला था इसलिए मैं दिल्ली वापस लौट चुका था मैं जब दिल्ली वापस लौटा तो उस वक्त काजल घर पर नहीं थी काजल अपने मम्मी पापा से मिलने के लिए गई हुई थी। मैंने काजल से फोन पर बात की तो उसने मुझे बताया कि वह दो दिन बाद वापस लौटेगी मैंने उससे कहा कोई बात नहीं। मैं दो दिन तो घर पर ही रहने वाला था क्योंकि मैंने अपने ऑफिस से दो दिन की छुट्टी ले ली थी। दो दिनों तक मैं घर पर ही था उसी दौरान हमारे पड़ोस में एक फैमिली शिफ्ट होने के लिए आई। वह लोग जब शिफ्ट हुए तो उस वक्त मैं भी उनसे मिलने के लिए गया लेकिन मेरी नजर तो कविता भाभी पर पड़ी और कविता भाभी की बड़ी गांड देखकर मेरा मन हुआ कि मैं उनकी चूत के मजे लू और उनके साथ में सेक्स करू लेकिन यह सब इतना आसान होने वाला नहीं था।

मुझे अब कविता भाभी पर डोरे डालने थे काजल भी अब वापस आ चुकी थी यह सब मेरे लिए आसान नहीं था। एक दिन मुझे मौका मिल ही गया मैं कविता भाभी के घर पर चला गया और उस दिन जब मैं उनके घर गया तो उनके पति अपने किसी दोस्त से मिलने के लिए गए हुए थे इसलिए मेरे लिए यह बहुत ही अच्छा मौका था। मैंने भी कविता भाभी से बात की और उनकी तारीफों के पुल बांधे जिसके बाद वह मुझसे बहुत ज्यादा खुश हो गई। मैंने जब उनकी जांघ पर हाथ रखा तो उन्होंने मुझे कुछ नहीं कहा मैंने उनकी छाती पर हाथ रखते हुए कहा कि भाभी आपके स्तन तो बहुत ही बड़े हैं। वह मुस्कुराने लगी और कहने लगी यह सब तुम्हारे भाई साहब ने किए हैं। मैंने उन्हें कहा कभी हमे भी आप मौका दीजिए तो वह कहने लगे जब आपका मन करे तो आप आ जाइए। मैंने उन्हें कहा मेरा मन तो अभी हो रहा है भला आप जैसी सुंदर हुस्न की परी को कौन छोड़ सकता है। वह इस बात पर और भी ज्यादा खुश हुई और उन्होंने मेरे सामने अपने ब्लाऊज को खोलते हुए जब अपनी ब्रा को उतारा तो उनके बड़े स्तन मै अपने हाथो में लेने के लिए बहुत उत्सुक था। मैंने उनके स्तनों को अपने हाथ मे लिया और दबाना शुरू किया। मैं जब उनके स्तनो को दबा रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने उनसे कहा मैं अब आपके साथ सेक्स करना चाहता हूं उन्होने अपनी साड़ी को ऊपर उठाया और जब उन्होंने अपनी पैंटी को उतारा तो उनकी चूत पर हलके काले बाल थे। मैं उनकी चूत को चाटने लगा उनकी चूत को चाटकर मैंने उनकी चूत से पूरी तरीके से पानी बाहर निकाल दिया था और अपने मोटे लंड को मैंने जब उनकी चूत पर लगाया तो मुझे गर्मी का एहसास होने लगा। वह पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी वह बहुत जोर से सिसकिया लेने लगी वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैंने भी अब उनकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया था और उनसे कहा कि कविता भाभी आखिरकार आपने मेरी इच्छा पूरी कर ही दी। वह मुझे कहने लगी आपके साथ बहुत मजा आ गया वह जिस प्रकार से मेरा साथ दे रही थी उससे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

मैंने जब उनकी चूत के अंदर तक लंड डाला तो वह अपने पैरों को खोलने लगी थी और मेरा मोटा लंड उनकी चूत के अंदर बाहर आसानी से हो रहा था। मैंने उन्हे कहा आज तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे आपको सिर्फ मैं चोदता ही रहूं। मेरा वीर्य जल्दी गिर गया क्योंकि मै उनकी गर्मी को ज्यादा देर तक बर्दाश्त ना कर सका परंतु उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह मे लेकर दोबारा से खड़ा कर दिया और जिस प्रकार से उन्होंने मेरे लंड को चूसा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गया था मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं सिर्फ उनसे अपने लंड को ही चूसवाता रहूं। मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल पोज मे बनाया तो उन्होंने मुझे कहा मुझे यह पोज बहुत ही पसंद है इसमें मुझे अपनी चूत मरवाने में मजा आता है। मैंने जब उनकी बड़ी गांड को देखा तो मैंने उनकी गांड के अंदर उंगली डाली लेकिन मै उनकी चूत मारना चाहता था।

मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर लगाते हुए उनकी चूत के अंदर घुसा दिया और उनकी चूत के अंदर मेरा लंड जाता ही वह जोर से चिल्लाई और कहने लगी तुम्हारा लंड बहुत मोटा है। मेरा लंड उनकी चूत मे जा रहा था तो और भी ज्यादा मोटा हो जाता। वह मुझे कहने लगी आज तुम्हारे साथ मुझे बहुत ही मजा आ रहा है मैंने उन्हें कहा आप भी अपनी चूतडो को मुझसे मिलाते रहिए। उन्होंने मुझसे अपनी चूतड़ों को टकराना शुरू कर दिया था जिसके बाद उन्होंने कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। जब हम दोनों की गर्मी बढने लगी तो मैंने उन्हें कहा मेरा वीर्य बाहर आने वाला है उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह मे ले लिया मैंने अपने सारे वीर्य को उनके मुंह में उड़ेल दिया।


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