मुझे अपना लो मेरे दिल के राजा


Antarvasna, kamukta: दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी से मैं परेशान हो चुका था अपनी जिंदगी से तो मैं परेशान हो चुका था मुझे थोड़ा बहुत समय अपने लिए भी चाहिए था। मैं चाहता था कि मैं अब अकेले में समय बिताऊँ इसलिए मैं अपने दोस्त के पास कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ चला गया मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी और मैं जब उसके पास गया तो वह मुझे कहने लगा कि राजेश तुम बहुत ज्यादा परेशान नजर आ रहे हो। मैंने अपने दोस्त को कहा कि मेरी जिंदगी में ना जाने कितनी परेशानियां हैं जिस वजह से मैं बहुत परेशान हो चुका हूं और इन परेशानियों से मैं दूर भागने की कोशिश कर रहा हूं। मेरे जीवन में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था मैं अपनी परेशानियों से इतना ज्यादा तंग आ चुका था कि मैं कुछ दिन अपने दोस्त के पास ही रुका और उसने फैसला किया कि हम लोग कुछ दिनों के लिए शिमला घूमने के लिए चले जाएं।

हम दोनों वहां से शिमला घूमने के लिए चले गए मुझे अब अकेले में सोचने का समय मिल चुका था मैंने अब फैसला कर लिया था कि मैं अपनी जॉब से रिजाइन दे दूंगा और अब मैं दूसरी कंपनी में जॉब ट्राई करूंगा या फिर अब मैं कोई बिजनेस ही करूंगा। मैंने फिलहाल इस बारे में गहन मंथन किया और मैं इन सब चीजों से भागने की कोशिश कर रहा था मेरी गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप के बाद मेरी जिंदगी में सब कुछ बदल चुका था उसकी शादी हो चुकी थी और मैं मानसिक रूप से तनाव में था। मैं जब शिमला गया तो शिमला में मुझे बहुत अच्छा लगा मैं और मेरा दोस्त शिमला में ही रुके हुए थे कुछ दिनों तक शिमला की वादियों में रहना मेरे लिए अच्छा था। हम लोग कुछ दिन बाद शिमला से चंडीगढ़ वापस लौट रहे थे लेकिन रास्ते में हमारी कार खराब हो गई और हम लोग एक सुनसान जगह पर खड़े थे वहां पर कोई आता हुआ दिखाई नहीं दे रहा था तभी आगे से एक कार आती हुई दिखाई दी और हमने उन्हें हाथ दिया तो उन्होंने गाड़ी रोक ली। जब उन्होंने गाड़ी रोक ली तो ड्राइवर ने हमसे पूछा कि क्या हुआ हमने उन्हें बताया कि पता नहीं हमारी कार में क्या खराबी आ चुकी है और आस पास कोई मैकेनिक भी नहीं है तो वह कहने लगे कि आओ हम आपको आगे तक छोड़ देते हैं।

हम लोग गाड़ी में बैठ गए जैसे ही मैं कार में बैठा तो मैंने देखा कार में एक पूरी फैमिली बैठी हुई थी मैं बीच की सीट में बैठा हुआ था और मेरे बगल में एक लड़की बैठी हुई थी उसे मैं देख रहा था और वह मेरी तरफ देख रही थी। हम लोग अब मैकेनिक के पास आ चुके थे मैंने मैकेनिक से कहा कि हमारी कार खराब हो चुकी है तो वह कहने लगा कि ठीक है साहब मैं आपकी गाड़ी ठीक कर देता हूं। वह हमारे साथ आ गया और अब वह कार देखने लगा किसी प्रकार से उसने कर ठीक कर दी और हम दोनों चंडीगढ़ लौट गए। जब हम लोग चंडीगढ़ लौटे तो मैंने अपने दोस्त से कहा कि मैं अब दिल्ली वापस जाना चाहता हूं वह कहने लगा कि तुम कुछ और दिन चंडीगढ़ में रुक जाओ मेरा दोस्त चाहता था कि मैं चंडीगढ़ में ही कुछ दिन रुक जाऊँ इसलिए मैं कुछ दिन चंडीगढ़ में ही रुक गया। जो लड़की मुझे शिमला से आते वक्त गाड़ी में दिखी थी वह लड़की मुझे दोबारा मिली उसने मुझे देखते ही पहचान लिया वह कहने लगी आप तो वही है ना जो उस दिन लिफ्ट मांग रहे थे और आपकी गाड़ी खराब हो गई थी। मैंने उसे बताया हां मेरा नाम राजेश है और मैं वही हूं मैंने उससे उसका नाम पूछा तो वह कहने लगी मेरा नाम सुहानी है। मैं और वह आपस में बात कर रहे थे हम दोनो एक दूसरे से बात कर रहे थे तो मैंने उससे पूछा कि तुम क्या करती हो वह कहने लगी कि मैं अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रही हूं। उसने मुझसे पूछा आप क्या करते हैं तो मैंने उसे बताया मैं एक कंपनी में जॉब करता हूं। पहली मुलाकात हम लोगों की अच्छी रही मैंने उससे बहुत देर तक बात की और पहली ही मुलाकात हम दोनों की बहुत अच्छी रही हम दोनों बहुत खुश थे कि पहली मुलाकात में हम दोनों की बात हुई। सुहानी कहने लगी कि मुझे अब घर जाने के लिए देर हो रही और फिर सुहानी अपने घर चली गई। मैंने जब यह बात अपने दोस्त को बताई तो वह कहने लगा कि लगता है तुम्हारी जिंदगी अब पहले जैसे होने वाली है मैंने उसे बताया तुम ऐसा क्यों कह रहे हो तो वह कहने लगा कि सुहानी तुम्हारी जिंदगी में आ चुकी है।

मैंने उसे कहा अभी तो मैंने उससे पहली बार ही बात की है तो वह कहने लगा कि क्या तुमने सुहानी का नंबर लिया मैंने उसे कहा हां मैंने सुहानी का नंबर ले लिया है। अब मैं सुहानी से मैसेज के माध्यम से बात करने लगा हम दोनों की बातें होने लगी और हम दोनों ही बहुत खुश थे काफी दिनों तक मैं सुहानी से फोन पर बात करता रहा लेकिन हम दोनों मिले नहीं थे। मैंने सुहानी को मिलने के लिए बुलाया और जब सुहानी मुझसे मिलने के लिए आई तो मैं बहुत ही खुश था मैंने उस दिन सुहानी से अपने दिल की बात कही तो सुहानी शरमाने लगी। आखिरकार उसने मेरे रिश्ते को स्वीकार कर ही लिया अब सुहानी और मेरा रिश्ता आगे बढ़ चला था मैं भी तब दिल्ली लौट आया था और सुहानी से मैं हर रोज फोन पर बात किया करता था। जिस दिन मेरी सुहानी से फोन पर बात नहीं होती उस दिन मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता उस दिन ऐसा लगता कि जैसे मेरा दिन आज अधूरा ही है। सब कुछ पहले जैसा होने लगा था मेरे जीवन में सिर्फ सुहानी के आने से ही मेरी जिंदगी खुशहाल हो चुकी थी मैंने सुहानी को अपने बारे में सब कुछ बता दिया था। सुहानी चाहती थी कि हम लोग मिले लेकिन मैंने कुछ ही समय पहले अपना कारोबार शुरू किया था इसलिए मैं सुहानी से मुलाकात नहीं कर पा रहा था। सुहानी से मेरी मुलाकात नहीं हो पा रही थी और हम दोनों एक दूसरे से मिल भी नहीं पा रहे थे लेकिन आखिरकार हम दोनों ने एक दिन मिलने का फैसला कर लिया।

जब हम लोग एक दूसरे से मिले तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा सुहानी और मैं एक दूसरे से दिल्ली में ही मिले सुहानी अपनी सहेली के पास कुछ दिनों के लिए रहने के लिए आई थी। मैं सुहानी से इतने समय बाद मिला तो मुझे बहुत अच्छा लगा सुहानी ने मुझसे कहा कि क्या आपका कारोबार ठीक चल रहा है तो मैंने सुहानी से कहा हां। हम दोनों अब एक दूसरे से शादी करना चाहते थे लेकिन यह सब इतना आसान होने वाला नहीं था सुहानी चाहती थी कि मैं उसके परिवार से इस बारे में बात करूं लेकिन मैं सुहानी के परिवार से इस बारे में अभी बात नहीं करना चाहता था मुझे थोड़ा वक्त चाहिए था। मैंने सुहानी से कहा कि सुहानी मुझे थोड़ा वक्त चाहिए तो सुहानी कहने लगी ठीक है जैसा आपको ठीक लगता है। सुहानी और मैं दूसरे से मिलकर बहुत खुश थे सुहानी चाहती थी कि मैं उससे मिलने के लिए उसकी सहेली के घर पर आऊं। मैं जब सुहानी से मिलने के लिए उसकी सहेली के घर पर गया तो उस दिन उसकी सहेली घर पर नहीं थी हम दोनों अकेले कमरे में थे मैंने सुहानी को अपनी बाहों में भर लिया जब मैंने सुहानी को अपनी बाहों में भर लिया तो उसके होंठ मेरे होंठों से टकराने के लिए बेताब थे मैंने अपने होठों को सुहानी के होठो से टकराना शुरू किया जिस प्रकार से उसके होठों को मैं चूम रहा था उससे वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी। मैं उसके बदन की गर्मी को महसूस करना चाहता था सुहानी ने मेरे लंड को बाहर निकाल लिया सुहानी मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड बहुत मोटा है मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लो और उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया जिस प्रकार से उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया उस से मुझे बहुत मजा आने लगा।

मैने अपने लंड को सुहानी के मुंह के अंदर तक घुसा दिया था काफी देर तक उसने मेरे लंड को ऐसे ही चूसा जब मैंने सुहानी के बदन से कपड़े उतारकर उसके गोरे बदन को महसूस करना शुरू किया तो वह मचलने लगी उसके स्तनों को मैं चूस रहा था तो उसके निप्पल खड़े होने लगे थे। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत आनंद आ रहा है उसने मेरे बदन की गर्मी को और भी बढ़ा दिया था उसके मुंह से जो सिसकिया निकल रही थी वह मेरे अंदर की गर्मी को और भी बढ़ा रही थी। मैं अब उसकी चूत में लंड घुसाने के लिए तैयार बैठा था मैंने सुहानी की चूत की तरफ देखा तो उसकी चूत में एक भी बाल नहीं था उसकी चूत से निकलता हुआ पानी मुझे अपनी और खींच रहा था मैंने उसकी चूत को बहुत देर तक चाटा वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी। मैं भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था सुहानी की चूत के अंदर जैसे ही मैंने अपने लंड को घुसाया तो वह चिल्लाने लगी उसकी चूत के अंदर तक मेरा लंड जा चुका था।

मैं सुहानी को तेज गति से धक्के मारता तो मुझे उसे धक्के मारने में बहुत ही आनंद आ रहा था जिस प्रकार से मैंने उसकी चूत के मजे लिए उससे वह मुझे कहने लगी कि मेरी चूत से खून बाहर निकलने लगा है। मैंने उसे कहा लेकिन मुझे तुम्हें चोदने में बहुत मजा आ रहा है मैं उसे तेज गति से चोद रहा था उसकी चूत मारना मेरे लिए बड़ा ही सुखद एहसास था मैं सब कुछ भूल कर उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था। मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी वह भी बहुत ज्यादा खुश थी वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा है जिस प्रकार से उसने मेरा साथ दिया उससे मेरा वीर्य बाहर आने लगा था। उसने अपने पैरों से मुझे जकड़ लिया था मैंने उसकी योनि के अंदर अपने वीर्य को गिराया और जैसे ही सुहानी की चूत के अंदर मेरा वीर्य गिरा उसने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया। सुहानी की चूत मारने में मुझे बहुत ही मजा आया उसकी चूत मारकर जिस प्रकार से मैंने अपने अंदर की गर्मी को मिटाया और सुहानी ने मेरा साथ दिया उससे मैं बहुत ज्यादा खुश था। सुहानी अब चंडीगढ़ लौट चुकी थी लेकिन हम लोगों की फोन पर अक्सर बात होती थी और मैं भी सुहानी को मिलने के लिए चंडीगढ़ जाता रहता। हमारे इस रिश्ते का कोई भविष्य मुझे नजर नहीं आ रहा था लेकिन उसके बावजूद भी हम दोनों एक दूसरे को खुश करने मैं लगे हुए थे।


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