वीर्य वर्षा स्तनों पर


Antarvasna, hindi sex story: पिताजी का ट्रांसफर कुछ समय पहले ही हुआ और अब हम लोग रायपुर आ चुके थे रायपुर बिल्कुल नया था और हम लोग आस पड़ोस में किसी को जानते भी नहीं थे। मेरे कॉलेज की पढ़ाई तो पूरी हो चुकी है और मैं घर पर अकेली ही थी तो मैं बहुत बोर हो जाया करती थी इसलिए मैंने अपने पिताजी से कहा कि पिताजी मैं स्कूल में पढ़ाना चाहती हूं। पिताजी को भी इस बात से कोई आपत्ति नही थी उन्होंने कहा कि ठीक है बेटा तुम स्कूल में पढ़ा लो। मैं उसके बाद स्कूल में पढ़ाने लगी जब मैं अपनी छुट्टी के दिन घर पर थी तो पिताजी मुझसे कहने लगे कि बेटा तुम्हारा स्कूल कैसा चल रहा है तो मैंने पिताजी से कहा सब कुछ ठीक चल रहा है। वह मुझे कहने लगे कि बेटा हम लोग कुछ दिनों के लिए तुम्हारे मामा जी के पास चले जाते हैं मैंने पिताजी को कहा क्या आपने ऑफिस से छुट्टी ले ली है तो वह कहने लगे कि हां मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली है। मेरी मम्मी भी इस बात से बड़ी खुश थी कि कम से कम हम लोग कुछ दिनों के लिए कहीं बाहर तो जाने वाले हैं घर में मैं एकलौती हूं।

पापा ने मुझे यह बात नहीं बताई थी कि मेरे मामाजी के लड़के की सगाई होने वाली है इसी वजह से हम लोग उनके घर जा रहे थे। काफी समय बाद जब मैं कोलकाता अपने मामा जी के पास गई तो उनसे मिलकर मुझे अच्छा लगा लेकिन जब मुझे इस बात की खबर हुई कि मेरे ममेरे भाई की सगाई है तो मैं बड़ी खुश हो गई। काफी समय बाद मैं कोलकाता आई थी इसलिए मैं अपनी छुट्टी का पूरा इंजॉय कर रही थी अब सगाई भी हो चुकी थी और पता ही नहीं चला कि कब एक हफ्ता हो गया। हम लोग अब वापस रायपुर लौट आए थे जब हम लोग वापस रायपुर के लिए लौटे तो उस वक्त ट्रेन मे एक अंकल से हमारी मुलाकात हुई। जब हमें पता चला कि वह भी हमारे पड़ोस में ही रहते हैं तो उन्होंने हमें अपने घर आने के लिए कहा लेकिन हम लोग उनके घर जा ना सके। काफी दिनों बाद वह अंकल मुझे मिले मैं उस वक्त अपने स्कूल से वापस लौट रही थी तो उन्होंने मुझे कहा कि बेटा आप लोग हमारे घर पर नहीं आए। मैंने उन्हें कहा अंकल पापा की छुट्टी नहीं थी इस वजह से हम लोग आ ना सके लेकिन मैं पापा से जरूर कहूंगी और हम लोग आपके घर पर आएंगे।

यह कहते हुए मैं भी अपने घर लौट आई जब मैं घर पर आई तो मैंने मम्मी से कहा कि मम्मी आपको याद है वह अंकल जो हमें ट्रेन में मिले थे आज उनसे मेरी मुलाकात हुई वह कह रहे थे कि आप लोग घर पर आइयेगा। मम्मी कहने लगी कि लगता है अब उनके घर पर जाना ही पड़ेगा। हम लोगों की आस पड़ोस में भी ज्यादा किसी के साथ बातचीत नहीं थी और जब हम लोग उनके घर पर गए तो उन्होंने अपनी पत्नी से हमें मिलवाया वह दोनों लोग घर पर रहते हैं उनका बड़ा बेटा इंग्लैंड में नौकरी करता है और छोटा बेटा बेंगलुरु में रहता है। मैंने अंकल से पूछा अंकल क्या आप घर पर अकेले बोर नहीं हो जाते तो वह कहने लगे कि बेटा अब आदत हो चुकी है रिटायरमेंट को 5 वर्ष हो चुके हैं और अब घर पर रहना ही अच्छा लगता है मैं और तुम्हारी आंटी साथ में समय बिताते हैं और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं। हम लोग उनके घर पर काफी समय तक रुके और फिर वापस हम लोग अपने घर लौट आए मम्मी अंकल की बहुत तारीफ कर रही थी। धीरे-धीरे हम दोनों परिवारों के बीच में अच्छी दोस्ती होने लगी और वह भी कभी हमारे घर आ जाया करते जब भी वह हमारे घर आते तो उन्हें बहुत अच्छा लगता और हम लोगों को भी बहुत अच्छा लगता था जब हम लोग उनके घर पर जाया करते। मैं अभी भी प्राइवेट स्कूल में ही पढ़ा रही हूं मैं और मेरी सहेली एक दिन आपस में बात कर रहे थे उसने मुझे बताया कि उसके भैया की शादी है तो उसने मुझे अपने घर पर बुलाया था वह मेरे साथ पढ़ाती है इसलिए मुझे उसके घर पर जाना पड़ा और उसके भैया की शादी मैंने अटेंड की। जब उस दिन मैं वापस लौट रही थी तो मुझे आने में देर हो गई थी पापा और मम्मी इस बात से बहुत चिंतित थे उन्होंने मुझे फोन किया तो मैंने उन्हें कहा पापा मैं बस थोड़ी देर बाद घर आ जाऊंगी। मैं जैसे ही घर पहुंची तो पापा मुझे कहने लगे कि बेटा तुम्हें पता है ना कि तुम कितनी देर में आ रही हो और हम लोग कितना घबरा गए थे मैंने उन्हें कहा मुझे भी डर लग रहा था लेकिन आइंदा से मैं कभी ऐसी गलती नहीं करूंगी।

पापा कहने लगे कि बेटा जब भी कहीं तुम्हें जाना होता है तो तुम अपनी मम्मी को अपने साथ लेकर जाया करो मैंने उन्हें कहा हां पापा आगे से मैं इस बात का ध्यान रखूंगी। कुछ दिनों बाद गोविंद अंकल हमारे घर पर आए गोविंद अंकल जब घर पर आए तो उन्होंने बताया कि उनका बेटा इंग्लैंड से लौट चुका है। मैंने उन्हें कहा चलिए यह तो बड़ी खुशी की बात है क्योंकि उस वक्त मैं भी अपने स्कूल से लौटी रही थी और गोविंद अंकल के साथ काफी देर तक मैंने बात की। मम्मी और मैं ही उस वक्त घर पर थे थोड़ी देर वह घर पर बैठे रहे फिर वह कहने लगे कि मैं चलता हूं लेकिन मम्मी ने उनके लिए चाय बना दी थी इसलिए वह कहने लगे कि चलो चाय पीकर ही मैं चला जाऊंगा। थोड़ी देर बाद वह चाय पीकर अपने घर के लिए चले गए मैं और मेरी मम्मी साथ में बैठे हुए थे और हम दोनों आपस में बात कर रहे थे। मम्मी ने मुझे कहा कि गोविंद जी कितने खुश नजर आ रहे हैं तो मैंने उन्हें कहा हां मम्मी आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं जब से उनका बेटा घर पर आया है तो वह बड़े ही खुश हैं। हर दिन की तरह मैं अपने स्कूल सुबह के वक्त निकल जाया करती और तीन चार बजे के आसपास मैं घर लौट आया करती थी।

एक दिन मैं अपने स्कूल से घर लौट रही थी कि तभी मुझे गोविंद अंकल और उनका बेटा दिखाई दिए उनके बेटे से पहली बार ही मैं मिल रही थी तो उन्होंने अपने बेटे से मेरा परिचय करवाया। उनके बेटे से मिलकर मुझे अच्छा लगा और पहली नजर में ही मेरे दिल मे उनके बेटे की तस्वीर छप गई मैं उनके बेटे की तरफ आकर्षित होने लगी थी उनके बेटे का नाम सोहन है। सोहन से मिलकर मुझे बड़ा अच्छा लगा सोहन कुछ समय के लिए घर पर ही रहने वाला था इसलिए सोहन से जब मैं मिली तो सोहन से मेरी नजदीकियां बढ़ने लगी हम दोनों की मुलाकात तीन-चार बार ही हुई थी लेकिन हम दोनों के बीच अच्छी बातचीत होने लगी। जब मैं गोविंद अंकल से मिलने के लिए गई तो उस वक्त कोई भी घर पर नहीं था सोहन ही घर पर था, जब मैं सोहन से मिली तो सोहन ने मुझे बताया कि पापा और मम्मी आज अपने किसी दोस्त के घर गए हुए हैं। मैं सोहन के साथ बैठी हुई थी उसने मुझे कहा क्या मैं तुम्हारे लिए चाय बना दूं? मैंने उसे कहा नहीं सोहन रहने दो तुम बेवजह क्यों इतनी तकलीफ कर रहे हो मैं और सोहन साथ में बैठे हुए थे लेकिन मैं तो सोहन की तरफ पूरी तरीके से फिदा थी। सोहन भी इस बात को जानने लगा था मैं उसे अपने स्तनों की लकीर को बार-बार दिखाती मैंने जब अपने स्तनों को सोहान को दिखाया तो सोहन अपने आपको रोक ना सका और सोहन मेरे पास आकर बैठा। सोहन मेरे इतने करीब आ चुका था कि हम दोनों के होंठ एक दूसरे से टकराने के लिए तैयार थे जैसे ही मेरे होंठ सोहन के होठों से टकराए तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था वह मेरे होठों का रसपान बड़े ही अच्छे तरीके से कर रहा था। वह जिस प्रकार से मेरे होठों का रसपान करता उससे तो मेरी चूत से भी पानी आने लगा था उसने मेरे सूट को खोलते हुए मेरी ब्रा को उतार फेंका और मेरे स्तनों को वह चूसने लगा। पहली बार ही मेरे बदन को किसी ने छुआ था इसलिए मुझे अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से वह मेरे गोरे और सुडौल स्तनों को दबा था उससे मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ जाती बहुत देर तक उसने ऐसा ही किया।

जब उसने मेरी सलवार के नाडे को खोलते हुए मेरी काली रंग की पैंटी को उतारते हुए मेरी चूत को अपनी उंगली से सहलाना शुरू किया तो मैं मचलने लगी मैं इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था मैंने अपने हाथों मे सोहन के मोटे लंड को लिया। सोहन का 9 इंच मोटा लंड जब मेरे हाथ में था तो मुझे उसकी गर्मी का एहसास हो रहा था मैंने उसे अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे बड़ा आनंद आने लगा बहुत देर तक मै उसके मोटे लंड को चूसती रही। जब मैं उसके लंड को चूसती तो मेरे मुंह के अंदर सोहन के लंड का पानी गिरने लगा था मेरी चूत से निकलते हुए गर्म पानी को सोहन ने अपनी जीभ से चाटना शुरू किया और वह बहुत देर तक मेरी चूत का रसपान करता रहा। मेरी चूत पूरी तरीके से गीली हो चुकी थी सोहन ने अपने मोटे लंड को मेरी चूत के अंदर डालना शुरू किया उसने मेरे दोनों पैरों को खोल लिया उसका लंड मेरी चूत के अंदर तक नहीं जा पा रहा था लेकिन धीरे-धीरे उसने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डालना शुरू किया उसका लंड मेरी चूत के अंदर तक जा चुका था। वह जिस प्रकार से मुझे चोद रहा था उससे मेरे सुडौल स्तन हिल रहे थे।

मैं सोहन का साथ बडे अच्छे तरीके से दे रही थी मेरे अंदर की गर्मी भी अब बढ़ रही थी मुझे बड़ा ही आनंद आ रहा था जिस प्रकार से सोहन मेरी चूत के मजे ले रहा था उसने मेरी चूत के मजे बहुत देर तक लिए और मेरी चूत से खून निकाल दिया था मेरी चूत से पानी भी निकल रहा था। मैं जब सोहन के लंड को अपनी चूत मे लेने लगी तो मैंने अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करना शुरू किया और उसके लंड को जब मैं अपनी चूत में लेती तो वह मेरे स्तनों को जोर से दबाता काफी देर तक उसने ऐसा ही किया। मैं बिल्कुल भी रहा ना सकी मेरी चूत से निकलती हुई गर्मी को शायद सोहन भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था इसलिए उसने मुझे नीचे लेटाते ही मेरे स्तनों पर अपने वीर्रय की वर्षा कर दी। जिस प्रकार से उसने मेरे स्तनों पर अपने वीर्य को गिराया मुझे बड़ा ही आनंद आया मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। सोहन ने मेरी जवानी को सफल बना दिया था।


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