वह नरम चूत जिसे मेरे लंड ने छुआ


Antarvasna, hindi sex story: मैं नया-नया दिल्ली में गया था मैंने अपने 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी और दिल्ली के कॉलेज में दाखिला लिया था पापा चाहते थे कि मैं दिल्ली में ही पढ़ाई करूं इसलिए कुछ समय तक मैं अपने मामा जी के घर पर रहा। मेरे मामा जी दिल्ली में ही रहते हैं और वह ट्रांसपोर्ट का बिजनेस चलाते हैं कुछ समय तक उनके घर पर रहने के बाद मैंने हॉस्टल में रहना ठीक समझा और मैं कॉलेज के हॉस्टल में ही रहने लगा। कुछ समय बाद मैं कॉलेज के दूसरे वर्ष में आ चुका था और मैं पढ़ाई पर पूरा ध्यान देता था। पापा का होटल व्यवसाय है लेकिन उसके बाद भी पापा चाहते थे कि मैं पढ़ाई करके किसी अच्छे प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी करुं। एक दिन मैं अपने कॉलेज पहुंचा उस दिन जब मैं कॉलेज पहुंचा तो काफी ज्यादा बारिश हो रही थी क्योंकि बरसात का मौसम था और बारिश काफी ज्यादा थी कॉलेज के बाहर काफी ज्यादा पानी भर चुका था इसलिए सब लोगों को आने में काफी दिक्कत हो रही थी। वहां से मैंने जब एक लड़की को आते हुए देखा तो मैं उसकी तरफ देखता ही रहा मैं एकटक नजरों से उसकी तरफ देखता रहा जब तक वह मेरे सामने नहीं आ गई।

जब वह मेरे सामने आई तो उसके कपड़े पूरी तरीके से भीगे हुए थे और उसके साथ एक और लड़की भी थी वह दोनों आपस में बात करने लगे और कहने लगे कि बारिश आज कुछ ज्यादा ही हो रही है। मैं सिर्फ उसे देखे जा रहा था लेकिन मुझे उसके बारे में कुछ भी पता नहीं था और ना ही मेरी उससे बात करने की हिम्मत हो रही थी  मैं सोचने लगा कि मुझे उसके बारे में तो पता करवाना ही चाहिए। मैं उस लड़की के बारे में पता करवाना चाहता था मैंने अपने दोस्त अंकित से इस बारे में कहा तो अंकित मुझे कहने लगा कि तुमने उस लड़की को अच्छे से देखा तो था ना। हमारा कॉलेज काफी बड़ा था और हमारे कॉलेज में ना जाने कितने ही बच्चे पढ़ते हैं लेकिन अंकित ने मेरी मदद की और अंकित ने मुझे बताया कि उसका नाम सरिता है। मैं और अंकित साथ में ही रहा करते थे एक दिन हम लोग अपने कॉलेज की कैंटीन में बैठे हुए थे तो उस दिन वहां पर सरिता अपनी सहेलियों के साथ आई हुई थी मैंने कॉफी का आर्डर करवा दिया था और मैं कॉफी पीते पीते सरिता की तरफ देख रहा था।

अंकित मुझसे कहने लगा कि सुमित तुम उसकी तरफ ऐसे मत देखो कहीं वह तुम्हें गलत ना समझ ले। अंकित बिल्कुल सही था और थोड़ी ही देर बाद वह मेरे पास आई और कहने लगी कि तुम मुझे काफी देर से घूर रहे हो मुझे पता है कि तुम जैसे लड़के को कैसे ठीक करना है। मैंने उसके बाद वहां से जाना ही बेहतर समझा मैं और अंकित वहां से चले गए, मैंने सरिता का गुस्सा भी देख लिया था सरिता ने कॉलेज में कुछ समय पहले ही एडमिशन लिया था और उसके बाद तो मैं जब भी सरिता को देखता तो मेरे दिल की धड़कने तेज हो जाया करती। मैं चाहता था कि मैं सरिता से बात करूं लेकिन अभी तक हम लोगों की कोई बात नहीं हो पाई थी शायद उसके दिमाग में मेरी छवि बिल्कुल गलत प्रकार की है वह मेरी तरफ कभी देखती ही नहीं थी। एक दिन मैं अपनी क्लास से बाहर आ रहा था उस वक्त अंकित मेरे साथ नहीं था वह कॉलेज नहीं आया था क्योंकि वह अपने किसी रिश्तेदार के घर गया हुआ था। उस दिन सरिता सामने से आ रही थी मैं सरिता की तरफ देख रहा था कि तभी वह मुझसे टकरा गई और एकदम से वह मेरी तरफ मुड़कर मुझे कहने लगी कि लगता है तुम कभी बाज नहीं आ सकते मैं तुम्हें हमेशा ही देखती हूं तुम ऐसे ही हो। मैंने उसे कहा शायद तुम गलत समझ रही हो मैं जानबूझकर तुमसे नहीं टकराया था उस दिन मैंने सरिता से बात की उसके बाद वह वहां से चली गई लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ी समस्या की बात तो यह थी कि मैं सरिता से कैसे बात करूं क्योंकि सरिता से बात करना इतना आसान नहीं था उसके दिमाग में मेरी जो छवि बन चुकी थी वह बिल्कुल ही अलग किस्म की थी लेकिन फिर भी मैं उसकी मदद कर दिया करता था। एक दिन सरिता का बर्थडे था और मुझे पता चला तो मैंने उसके घर पर गिफ्ट भिजवा दिया था लेकिन मैंने उसे कभी यह पता नहीं चलने दिया था कि मैंने उसके लिए गिफ्ट भिजवाया था। सरिता से मेरी उस वक्त बातचीत होने लगी जब सरिता कॉलेज के दूसरे वर्ष में आ गई थी और मैं कॉलेज के लास्ट वर्ष में था मेरा ग्रेजुएशन का यह लास्ट ईयर था।

सरिता और मैं अब एक दूसरे से बात करने लगे थे सरिता मुझसे बात करती तो हमेशा कहती कि मैं तुम्हें जैसा समझती थी तुम बिल्कुल भी वैसे नहीं हो। वह हमेशा ही मुझसे कहती कि मुझे अपने व्यवहार के लिए तुमसे माफी मांगनी चाहिए मैं उसे कहता कि सरिता ऐसा कभी कबार हो जाता है लेकिन अब हम दोनों के बीच सिर्फ अच्छी दोस्ती थी और हम दोनों अच्छे दोस्त बन चुके थे। मैं चाहता था कि सरिता से मै अपने दिल की बात कहूं लेकिन यह इतना आसान नहीं था पर मैंने सरिता के दिल मे अपनी छाप तो छोड़ ही दी थी। सरिता मुझ पर पूरा भरोसा करने लगी थी एक दिन हम दोनो मूवी देखने के लिए साथ में गए उस दिन मैं और सरिता अकेले थे लेकिन उस दिन जब मैंने पहली बार सरिता का हाथ पकड़ा तो मेरे दिल की धड़कन बहुत तेजी से दौडने लगी थी अब शायद मेरी दिल की धड़कन इतनी ज्यादा तेज हो चुकी थी कि मैं बिल्कुल भी अपने आपको रोक ना सका और मेरा हाथ सरिता के बूब्स पर लग गया था।

मैंने उसके स्तनो पर हाथ लगाया तो वह भी अपने आपको कंट्रोल ना कर सकी और वह मुझे किस करने लगी। हम दोनों एक दूसरे के बाहों में आ चुके हैं और एक दूसरे के होठों को चूमने लगे अब हम दोनों इतने ज्यादा उत्तेजित हो गए थे कि मैंने उसकी जींस के अंदर हाथ डालते ही उसकी चूत को सहलाना शुरू किया तो वह भी अपने आपको रोक ना सकी और वह मुझे कहने लगी सुमित कहीं चलते हैं। मैं सोचने लगा मैं उसे कहां लेकर जाऊं मैंने उस दिन अपने एक दोस्त को फोन किया और उसने मेरी मदद की मैं जब उसे अपने दोस्त के घर लेकर गया तो सरिता और मैं पूरी तरीके से गरम हो चुके थे इसलिए अब हम दोनों को अपने आप को रोक पाना बहुत ही मुश्किल था। मैंने सरिता के कपड़े उतारते ही जब मैंने उसकी टाइट जींस को उतारा तो उसकी मोटी जांघे मेरे सामने थी और मैं अब उसे अपनी बाहों में लेकर उसकी गांड को दबाने लगा। मैं जब उसके गांड को दबा रहा था तो वह मुझसे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है अब मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया था। मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया था जिसके बाद मै उसके नरम और मुलायम होठों को चूम रहा था और मैंने उसके स्तनों को अपने हाथो से दबाया और मै उसके बूब्स को अपने मुंह में लेने लगा उसके निप्पल जब मैं अपने मुंह में लेकर चूसता तो वह जोर-जोर से सिसकिया लेने लगती और उसकी सिसकियो मे अब लगातार बढ़ोतरी होती जा रही थी। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया तो उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा था और उसकी योनि से इतना अधिक मात्रा में पानी बाहर निकल रहा था वह अब अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी। मैंने कुछ देर तक उसके नरम और मुलायम चूत को चाटा थोड़ी देर तक मैं उसकी चूत को चाटता रहा लेकिन अब उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही अधिक मात्रा में पानी निकलने लग गया था जिस वजह से वह मुझसे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैने अपने लंड को उसकी चूत पर सटाया और अपने मोटे लंड को धीरे धीरे उसकी चूत मे घुसाना शुरू किया।

जब मैने धक्का मारा तो मेरे लंड का आगे का हिस्सा उसकी चूत मे चला गया वह बहुत जोर से चिल्लाई। मैंने अब एक ही झटके के साथ उसकी चूत के अंदर अपने लंड घुसा दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो सरिता जोर से चिल्लाने लगी तुमने तो मेरी चूत ही फाड़ दी है। मैंने सरिता से कहा तुम्हारी चूत से खून आने लगा है उसकी योनि से बहुत ही अधिक मात्रा में खून निकलने लगा था और उसे मजा भी आने लगा था। अब मैंने उसके पैरों को खोल लिया था जब मैंने उसके पैरों को खोलकर उसकी दोनों जांघों को पकड़कर कस कर उसे धक्का देना शुरू किया तो उसे भी अब अच्छा लगने लगा था और वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया था जिससे कि मेरा लंड उसकी चूत में आसानी से अंदर बाहर हो सके और मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी।

उसकी उत्तेजना इस कदर बढ़ने लगी कि मुझे साफ तौर पर लगने लगा था कि वह ज्यादा देर तक मेरा साथ नहीं दे पाई और ऐसा ही हुआ जब वह झड़ गई तो उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया। जब उसने ऐसा किया तो मुझे उसकी चूत और भी ज्यादा टाइट महसूस होने लगी करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपने वीर्य को सरिता की योनि में गिराया और उसकी सील पैक चूत मार कर मुझे जो मजा आया वह मेरे लिए बहुत ही मजेदार पल था। हम दोनों ने उसके बाद भी काफी देर तक सेक्स किया जब हम दोनों पूरी तरीके से थक गए उसके बाद सहम दोनो एक दूसरे की बाहों में लेटे चुके थे।


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